Stories, Books, Writing

Chocolate – A Short Story

chocolate short story

शुभम एक साधारण परिवार का लड़का था। वह रोज़ स्कूल जाता, अपनी कक्षा की सबसे पीछे वाली सीट पर बैठता और चुपचाप पढ़ाई करता। लेकिन उसकी नज़रें अक्सर कक्षा में सबसे आगे बैठने वाली प्रीति पर टिक जाती थीं।

प्रीति एक खुशमिज़ाज लड़की थी। वह अपनी पढ़ाई में व्यस्त रहती और दोस्तों के साथ हँसती-बोलती थी। उसे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि कक्षा के आखिरी कोने में बैठने वाला शुभम कई महीनों से उसे पसंद करता है।

शुभम के लिए प्रीति सिर्फ एक लड़की नहीं, बल्कि उसकी पूरी दुनिया बन चुकी थी। धीरे-धीरे वह स्कूल पढ़ने से ज़्यादा प्रीति को देखने के लिए आने लगा।

कभी-कभी वह अपने दोस्तों से कहता,

“अगर प्रीति मुझे नहीं मिली, तो मैं मर जाऊँगा।”

उसके दोस्त उसकी बात सुनकर हँस देते, लेकिन शुभम के मन में चल रही भावनाओं की गहराई को कोई नहीं समझता था।

शुभम ने कभी प्रीति से बात करने की हिम्मत नहीं की थी। वह रोज़ सोचता कि आज उससे अपने दिल की बात कह देगा, मगर जब भी प्रीति उसके सामने आती, उसकी ज़ुबान लड़खड़ाने लगती और वह चुप रह जाता।

फिर एक दिन उसे पता चला कि अगले दिन प्रीति का जन्मदिन है।

यह सुनकर उसके चेहरे पर खुशी आ गई। उसने मन ही मन फैसला किया कि वह प्रीति को जन्मदिन की बधाई देगा, उसे चॉकलेट देगा और अपने दिल की बात भी कह देगा।

लेकिन उसके सामने एक बड़ी परेशानी थी। उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह प्रीति के लिए कोई उपहार खरीद सके।

उस रात शुभम देर तक सोचता रहा। आखिरकार उसने तय किया कि वह कहीं काम करके पैसे कमाएगा।

अगली रात शुभम एक दुकान पर काम करने चला गया। उसने मेहनत की और बदले में कुछ पैसे कमाए।

पैसे हाथ में आते ही उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह उन पैसों से प्रीति के लिए चॉकलेट खरीद लाया।

घर लौटते समय उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी।

वह बार-बार चॉकलेट को देखता और सोचता कि जब वह प्रीति को यह तोहफ़ा देगा, तो वह कितनी खुश होगी।

उसने मन ही मन अपने शब्द भी तैयार कर लिए थे।

“प्रीति, जन्मदिन मुबारक हो। मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूँ।”

वह रात भर अगले दिन का इंतज़ार करता रहा। उसे लग रहा था कि उसकी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत दिन आने वाला है।

उसे नहीं पता था कि कभी-कभी इंसान जिस पल को अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी खुशी समझता है, वही पल उसके लिए एक दर्दनाक याद बन जाता है।

अगली सुबह शुभम स्कूल पहुँचा। आज वह रोज़ की तरह शांत तो था, लेकिन उसके दिल में बहुत कुछ चल रहा था।

प्रीति आज बहुत खुश थी। उसके जन्मदिन पर उसके दोस्त उसे बधाई दे रहे थे। कोई उससे हाथ मिला रहा था, तो कोई उसके लिए उपहार लेकर आया था।

शुभम अपनी आखिरी सीट पर बैठा सब कुछ देख रहा था। उसकी जेब में रखी चॉकलेट बार-बार उसे याद दिला रही थी कि आज उसे अपने दिल की बात कहनी है।

उसने सोचा कि जब प्रीति के दोस्त कक्षा से बाहर चले जाएँगे, तब वह उसके पास जाकर बात करेगा।

लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

कभी प्रीति के आसपास उसके दोस्त आ जाते, तो कभी शुभम खुद ही घबरा जाता। कई बार वह अपनी सीट से उठने की कोशिश करता, लेकिन फिर वापस बैठ जाता।

देखते ही देखते स्कूल की छुट्टी हो गई।

शुभम का एक और दिन बिना कुछ कहे बीतने वाला था। मगर इस बार उसने हिम्मत नहीं हारने का फैसला किया।

उसने सोचा कि वह स्कूल के बाहर प्रीति से बात करेगा।

स्कूल की छुट्टी के बाद प्रीति अपने घर की तरफ जा रही थी। शुभम भी उसके पीछे-पीछे चलने लगा।

कुछ दूर जाने के बाद उसने हिम्मत जुटाई और प्रीति को रोक लिया।

प्रीति ने हैरानी से उसकी तरफ देखा।

“क्या हुआ? मुझे क्यों रोका है?” उसने पूछा।

शुभम घबराते हुए बोला, “प्रीति… जन्मदिन मुबारक हो।”

उसने अपनी जेब से चॉकलेट निकाली और प्रीति की तरफ बढ़ा दी।

प्रीति कुछ पल के लिए उसे देखती रही। फिर उसने चॉकलेट ले ली और कहा, “थैंक यू।”

वह वहाँ से जाने लगी।

शुभम को लगा कि अगर आज उसने अपने दिल की बात नहीं कही, तो शायद वह कभी नहीं कह पाएगा।

उसने पीछे से आवाज़ दी, “प्रीति, एक मिनट!”

प्रीति रुक गई।

शुभम ने काँपती हुई आवाज़ में कहा,

“प्रीति, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो। मैं तुमसे प्यार करता हूँ।”

यह सुनते ही प्रीति का चेहरा बदल गया। उसने गुस्से से शुभम की तरफ देखा और उसके गाल पर एक थप्पड़ मार दिया।

फिर उसने चॉकलेट शुभम की तरफ फेंक दी और गुस्से में बोली,

“दोबारा मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना! मैं तुम्हारे जैसे लड़कों को अच्छी तरह जानती हूँ। पहले अपनी हालत देखो और फिर मुझे देखो। ये चॉकलेट खरीदकर लाए हो या चुराकर?”

शुभम कुछ बोल नहीं पाया।

जिस चॉकलेट को खरीदने के लिए उसने मेहनत की थी, उसी चॉकलेट के कारण उस पर चोरी का इल्ज़ाम लगा दिया गया था।

प्रीति वहाँ से चली गई।

शुभम सड़क पर खड़ा रह गया। उसकी आँखों में आँसू थे और दिल में अनगिनत सवाल।

वह सोच रहा था कि क्या किसी को पसंद करना इतना बड़ा गुनाह है? क्या गरीब होने की वजह से उसके प्यार की कोई कीमत नहीं थी?

उसने तो सिर्फ अपने दिल की बात कही थी। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसे इस तरह अपमानित होना पड़ेगा।

उस दिन पहली बार उसे महसूस हुआ कि प्यार की उम्मीद में उसने अपने मन में एक ऐसी दुनिया बना ली थी, जिसमें प्रीति के लिए तो जगह थी, लेकिन उसकी अपनी खुशियों के लिए कोई जगह नहीं बची थी।

उस घटना के बाद शुभम एक पुल पर जाकर अकेला बैठ गया।

नीचे से गाड़ियाँ तेज़ी से गुज़र रही थीं। वह उन्हें देखता रहा और उसके कानों में प्रीति के कहे हुए शब्द गूँजते रहे।

“पहले अपनी हालत देखो और फिर मुझे देखो…”

उसे सबसे ज़्यादा दर्द इस बात का था कि उसने प्रीति को चॉकलेट देने के लिए मेहनत की थी। वह कोई चोरी करके नहीं लाया था। फिर भी उसे चोर समझ लिया गया।

उसके मन में निराशा भर गई।

वह सोचने लगा कि जिस लड़की को उसने इतने महीनों से अपने दिल में जगह दी थी, उसके लिए उसने कितने सपने देखे थे। लेकिन उस लड़की ने एक पल में उसके सारे सपनों को तोड़ दिया।

एक तेज़ आवाज़ के साथ एक कार पुल के पास से गुज़री।

शुभम कुछ देर तक वहीं बैठा रहा। उसके मन में दर्द था, लेकिन उसकी ज़िंदगी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी।

उसे अभी यह समझना बाकी था कि एक इंसान का ठुकरा देना पूरी ज़िंदगी का ठुकराया जाना नहीं होता।

और यह भी कि जिस प्यार को पाने के लिए वह बेचैन था, उससे कहीं ज़्यादा सच्चा अपनापन उसका इंतज़ार उसके अपने घर में कर रहा था।

रात हो चुकी थी।

घर में शुभम की माँ बैठकर कपड़े सिल रही थी। पास ही उसकी छोटी बहन अपने खिलौनों के साथ खेल रही थी।

घर की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी। उसकी माँ मेहनत करके परिवार का खर्च चलाने की कोशिश करती थी।

तभी दरवाज़ा खुला।

शुभम घर के अंदर आया।

उसकी माँ ने उसकी तरफ देखा। छोटी बहन भी उसे देखकर मुस्कुराने लगी।

शुभम ने अपनी जेब में हाथ डाला। उसके पास कुछ चॉकलेट बची हुई थीं।

वह अपनी छोटी बहन के पास गया और चॉकलेट उसकी तरफ बढ़ा दी।

चॉकलेट देखते ही उसकी बहन खुशी से उछल पड़ी। उसने चॉकलेट अपने हाथों में ली और तुरंत शुभम के गले से लग गई।

“भैया!” वह खुशी से बोली।

शुभम ने अपनी बहन को गले लगा लिया।

कई घंटों से उसके दिल में जो दर्द जमा था, वह अपनी छोटी बहन की मासूम खुशी देखकर कुछ कम होने लगा।

उसकी माँ यह सब देखकर मुस्कुराई।

शुभम ने माँ की तरफ देखा। फिर अपनी बहन के चेहरे पर खुशी देखी।

उसे एहसास हुआ कि जिस चॉकलेट को वह किसी और को देकर अपनी खुशी ढूँढ़ रहा था, उसी चॉकलेट ने आज उसके अपने घर में इतनी खुशियाँ भर दी थीं।

जिस लड़की के लिए उसने मेहनत की थी, उसने उसकी भावनाओं को नहीं समझा। लेकिन उसकी छोटी बहन ने बिना किसी सवाल के उसके दिए हुए छोटे-से तोहफ़े को प्यार से स्वीकार कर लिया।

उस पल शुभम को समझ आया कि ज़िंदगी में किसी एक इंसान का प्यार न मिलना इस बात का सबूत नहीं है कि वह प्यार के काबिल नहीं है।

उसके पास माँ थी, बहन थी और एक परिवार था, जो उससे प्यार करता था।

उसे अपनी ज़िंदगी को किसी एक इंसान के जवाब पर खत्म नहीं करना था। उसे आगे बढ़ना था, अपने परिवार के लिए कुछ करना था और अपनी पहचान बनानी थी।

शुभम ने अपनी बहन को फिर से गले लगा लिया।

इस बार उसके चेहरे पर एक सच्ची मुस्कान थी।

वह मुस्कान किसी के मिल जाने की नहीं, बल्कि ज़िंदगी की असली कीमत समझ लेने की थी।

उस रात शुभम ने अपने दिल में एक नई शुरुआत की।

अब वह सिर्फ प्रीति के पीछे भागने वाला लड़का नहीं था। अब वह अपने परिवार के लिए जीने, मेहनत करने और अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ने का फैसला कर चुका था।

क्योंकि कभी-कभी ज़िंदगी हमें वह नहीं देती, जो हम चाहते हैं। वह हमें यह सिखाती है कि हमारे पास जो है, उसकी कीमत क्या है।

और शुभम के लिए उस दिन सबसे कीमती चीज़ कोई महँगा उपहार नहीं, बल्कि एक छोटी-सी चॉकलेट और उसकी बहन की मुस्कान थी।

एकतरफा प्यार में असफल होने का मतलब यह नहीं कि ज़िंदगी खत्म हो गई।

किसी के प्यार को पाने के लिए खुद को नुकसान पहुँचाना, अपनी जान देना, किसी दूसरे की जान लेना, उस पर तेज़ाब फेंकना या उसका जीना मुश्किल करना कभी सही नहीं है।

प्यार में किसी को पसंद करना गलत नहीं, लेकिन सामने वाले की इच्छा और उसकी ‘ना’ का सम्मान करना ज़रूरी है। प्यार किसी पर अधिकार जमाने का नाम नहीं, बल्कि उसकी भावनाओं और फैसलों का सम्मान करने का नाम है।

किसी का इनकार आपकी कीमत तय नहीं करता। आपकी ज़िंदगी, आपके सपने और आपका परिवार किसी एक व्यक्ति की स्वीकृति से कहीं अधिक मायने रखते हैं।

समाप्त

Share
Join as WriterEmail Us